Monday, November 2, 2026

ग़ज़ल की सम्पूर्ण बह्र कोश (भाग–3)

  

ग़ज़ल की सम्पूर्ण बह्र कोश (भाग–3)

बह्र-ए-हज़ज, बह्र-ए-रमल और बह्र-ए-रजज़ का विस्तृत अध्ययन

रुक्न, विशेषताएँ, प्रयोग, अभ्यास एवं तक्तीअ सहित

भूमिका

अब तक हम दो प्रमुख बह्रों—

  • बह्र-ए-मुतक़ारिब

  • बह्र-ए-मुतदारिक

का परिचय प्राप्त कर चुके हैं।

इस अध्याय में हम उन तीन बह्रों का अध्ययन करेंगे जिनका प्रयोग उर्दू एवं हिन्दी ग़ज़लों में अत्यधिक होता है—

  • बह्र-ए-हज़ज

  • बह्र-ए-रमल

  • बह्र-ए-रजज़

इन तीनों बह्रों का अभ्यास करने के बाद विद्यार्थी अधिकांश प्रसिद्ध ग़ज़लों की लय को समझना प्रारम्भ कर देते हैं।

ग़ज़ल की सम्पूर्ण बह्र कोश (भाग–3)

   ग़ज़ल की सम्पूर्ण बह्र कोश (भाग–3) बह्र-ए-हज़ज, बह्र-ए-रमल और बह्र-ए-रजज़ का विस्तृत अध्ययन रुक्न, विशेषताएँ, प्रयोग, अभ्यास एवं तक्तीअ स...