ग़ज़ल की सम्पूर्ण बह्र कोश (भाग–3)
बह्र-ए-हज़ज, बह्र-ए-रमल और बह्र-ए-रजज़ का विस्तृत अध्ययन
रुक्न, विशेषताएँ, प्रयोग, अभ्यास एवं तक्तीअ सहित
भूमिका
अब तक हम दो प्रमुख बह्रों—
बह्र-ए-मुतक़ारिब
बह्र-ए-मुतदारिक
का परिचय प्राप्त कर चुके हैं।
इस अध्याय में हम उन तीन बह्रों का अध्ययन करेंगे जिनका प्रयोग उर्दू एवं हिन्दी ग़ज़लों में अत्यधिक होता है—
बह्र-ए-हज़ज
बह्र-ए-रमल
बह्र-ए-रजज़
इन तीनों बह्रों का अभ्यास करने के बाद विद्यार्थी अधिकांश प्रसिद्ध ग़ज़लों की लय को समझना प्रारम्भ कर देते हैं।