Friday, August 7, 2026

ग़ज़ल सीखें -भाग–2

 ग़ज़ल सीखें (भाग–2) ग़ज़ल की संरचना – शेर, मिसरा, मतला, मक़्ता, रदीफ़, क़ाफ़िया, बह्र, ज़मीन और तख़ल्लुस

भूमिका

पिछले भाग में हमने जाना कि ग़ज़ल क्या है, उसका इतिहास क्या है तथा वह सामान्य कविता से किस प्रकार भिन्न है। अब हम ग़ज़ल के सबसे महत्वपूर्ण भाग में प्रवेश करते हैं। यदि किसी रचनाकार को ग़ज़ल लिखनी है, तो उसे सबसे पहले ग़ज़ल की संरचना (Structure) को भली-भाँति समझना होगा।

ग़ज़ल की सुंदरता केवल भावों में नहीं होती, बल्कि उसके शिल्प, अनुशासन और संतुलन में भी होती है। एक छोटी-सी त्रुटि भी ग़ज़ल को उसके मूल स्वरूप से अलग कर सकती है। इसलिए प्रत्येक नए ग़ज़लकार के लिए यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Tuesday, July 21, 2026

ग़ज़ल सीखें (भाग–1)

ग़ज़ल क्या है? – इतिहास, उत्पत्ति, विकास, परिभाषा एवं ग़ज़ल की मूल अवधारणा

भूमिका - ग़ज़ल केवल एक काव्य-विधा नहीं है, बल्कि भावों की सुसंस्कृत, लयात्मक और कलात्मक अभिव्यक्ति का अद्भुत माध्यम है। प्रेम, विरह, आध्यात्मिकता, दर्शन, सामाजिक यथार्थ, राजनीति, मानवीय संवेदनाएँ और जीवन के सूक्ष्म अनुभव—इन सबको ग़ज़ल अत्यंत प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करती है।

ग़ज़ल सीखें -भाग–2

  ग़ज़ल सीखें (भाग–2)  ग़ज़ल की संरचना – शेर, मिसरा, मतला, मक़्ता, रदीफ़, क़ाफ़िया, बह्र, ज़मीन और तख़ल्लुस भूमिका पिछले भाग में हमने जाना क...