Monday, November 2, 2026

ग़ज़ल की सम्पूर्ण बह्र कोश (भाग–3)

  

ग़ज़ल की सम्पूर्ण बह्र कोश (भाग–3)

बह्र-ए-हज़ज, बह्र-ए-रमल और बह्र-ए-रजज़ का विस्तृत अध्ययन

रुक्न, विशेषताएँ, प्रयोग, अभ्यास एवं तक्तीअ सहित

भूमिका

अब तक हम दो प्रमुख बह्रों—

  • बह्र-ए-मुतक़ारिब

  • बह्र-ए-मुतदारिक

का परिचय प्राप्त कर चुके हैं।

इस अध्याय में हम उन तीन बह्रों का अध्ययन करेंगे जिनका प्रयोग उर्दू एवं हिन्दी ग़ज़लों में अत्यधिक होता है—

  • बह्र-ए-हज़ज

  • बह्र-ए-रमल

  • बह्र-ए-रजज़

इन तीनों बह्रों का अभ्यास करने के बाद विद्यार्थी अधिकांश प्रसिद्ध ग़ज़लों की लय को समझना प्रारम्भ कर देते हैं।

Friday, August 7, 2026

ग़ज़ल सीखें -भाग–2

 ग़ज़ल सीखें (भाग–2) ग़ज़ल की संरचना – शेर, मिसरा, मतला, मक़्ता, रदीफ़, क़ाफ़िया, बह्र, ज़मीन और तख़ल्लुस

भूमिका

पिछले भाग में हमने जाना कि ग़ज़ल क्या है, उसका इतिहास क्या है तथा वह सामान्य कविता से किस प्रकार भिन्न है। अब हम ग़ज़ल के सबसे महत्वपूर्ण भाग में प्रवेश करते हैं। यदि किसी रचनाकार को ग़ज़ल लिखनी है, तो उसे सबसे पहले ग़ज़ल की संरचना (Structure) को भली-भाँति समझना होगा।

ग़ज़ल की सुंदरता केवल भावों में नहीं होती, बल्कि उसके शिल्प, अनुशासन और संतुलन में भी होती है। एक छोटी-सी त्रुटि भी ग़ज़ल को उसके मूल स्वरूप से अलग कर सकती है। इसलिए प्रत्येक नए ग़ज़लकार के लिए यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है।

ग़ज़ल की सम्पूर्ण बह्र कोश (भाग–3)

   ग़ज़ल की सम्पूर्ण बह्र कोश (भाग–3) बह्र-ए-हज़ज, बह्र-ए-रमल और बह्र-ए-रजज़ का विस्तृत अध्ययन रुक्न, विशेषताएँ, प्रयोग, अभ्यास एवं तक्तीअ स...